
जिला मुख्यालय में रैली और धरना प्रदर्शन में शामिल हुई सैकड़ो कार्यकर्ता-सहायिका
9 मार्च को विधानसभा घेराव की चेतावनी
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संयुक्त मंच छत्तीसगढ़ के प्रांतीय आह्वान पर जिले में 26 और 27 फरवरी 2026 को दो दिवसीय कामबंद आंदोलन के तहत खैरागढ़ जिला मुख्यालय के इतवारी बाजार स्थित रावण भाटा में धरना, रैली और प्रदर्शन आयोजित कर केंद्र एवं राज्य सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की गई। आंदोलन के कारण जिले के अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्रों में ताला लटका रहा।
आंदोलनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी तथा छत्तीसगढ़ की महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के नाम कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। संयुक्त मंच की जिला अध्यक्ष लता तिवारी, खैरागढ़ ब्लॉक अध्यक्ष रामकली यादव, छुईखदान ब्लॉक अध्यक्ष जयश्री गंधर्व, जिला उपाध्यक्ष बदरूँ निशा सहित धरमशिला नेताम, उमा ठाकुर, राजेश्वरी धुर्वे, अनुपा और शारदा कौशिक ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि एकीकृत बाल विकास सेवा (आईसीडीएस) योजना के 50 वर्ष पूर्ण होने और देश में ‘अमृत काल’ मनाए जाने के बावजूद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 के बाद से केंद्र सरकार द्वारा मानदेय में कोई वृद्धि नहीं की गई है। वर्तमान में कार्यकर्ताओं को 4500 रुपये और सहायिकाओं को 2250 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है, जो बढ़ती महंगाई के बीच जीवन-यापन के लिए अपर्याप्त है। बजट में प्रावधान नहीं, आक्रोश बढ़ा
संयुक्त मंच ने आरोप लगाया कि वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट तथा छत्तीसगढ़ राज्य बजट में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं के शासकीयकरण, न्यूनतम वेतन, पेंशन और ग्रेच्युटी जैसे मुद्दों पर कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया। मंच के अनुसार देशभर की लगभग 28 लाख तथा छत्तीसगढ़ की करीब एक लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाएं इससे प्रभावित हैं।
ज्ञापन में प्रमुख मांग में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं को शिक्षाकर्मी एवं पंचायत कर्मियों की तर्ज पर शासकीय कर्मचारी घोषित किया जाए। शासकीयकरण तक कार्यकर्ताओं को 26,000 रुपये तथा सहायिकाओं को 22,100 रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाए। मध्यप्रदेश की तर्ज पर प्रतिवर्ष 1000 रुपये की वेतन वृद्धि लागू की जाए। सेवानिवृत्ति पर मासिक पेंशन एवं एकमुश्त ग्रेच्युटी की व्यवस्था की जाए।
समूह बीमा, कैशलेस चिकित्सा सुविधा और आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में अनुकंपा नियुक्ति दी जाए।
पारिवारिक दायित्वों के निर्वहन हेतु पर्याप्त सवैतनिक अवकाश की सुविधा सुनिश्चित की जाए। मंच का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में अवकाश लेने पर मानदेय कटौती की जाती है, जिससे कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को आर्थिक व सामाजिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
8 मार्च तक निर्णय नहीं तो 9 मार्च को विधानसभा घेराव
संयुक्त मंच ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 8 मार्च 2026 तक मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 9 मार्च को प्रदेश की एक लाख से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाएं राजधानी रायपुर पहुंचकर विधानसभा का घेराव करेंगी और आंदोलन को व्यापक रूप देंगी। पदाधिकारियों ने कहा कि यदि सरकारें महिला सशक्तिकरण की बात करती हैं तो जमीनी स्तर पर कार्यरत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को सम्मानजनक वेतन एवं सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। मंच ने दोनों सरकारों से मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर शीघ्र ठोस निर्णय लेने की अपेक्षा जताई है।