
27 केंद्रों के बच्चों की जिम्मेदारी छोड़ गार्डन में जुटीं कार्यकर्ता-सहायिकाएं
व्हाट्सएप ग्रुप में पहले से बना था आयोजन का प्लान
जिला परियोजना अधिकारी ने जांच और नोटिस की कही बात
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। महिला एवं बाल विकास विभाग के खैरागढ़ शहरी सेक्टर में शनिवार को आंगनबाड़ी संचालन व्यवस्था को लेकर गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। आरोप है कि शहरी क्षेत्र के करीब 27 आंगनबाड़ी केंद्रों का नियमित संचालन छोड़कर अधिकांश कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं अटल उद्यान में आयोजित कथित ग्रीन डे/सावन महोत्सव में शामिल होने पहुंच गईं। खास बात यह है कि इस आयोजन की योजना एक दिन पहले ही विभागीय व्हाट्सएप ग्रुप में बनाई गई थी। आयोजन के लिए कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से पहुंचने और अनुपस्थित रहने पर 500 रुपये जुर्माना देने तक का फरमान जारी किए जाने की बात सामने आई है।
बच्चों की जिम्मेदारी छोड़ गार्डन में पहुंचने का फरमान
जानकारी अनुसार खैरागढ़ शहरी सेक्टर के आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के व्हाट्सएप ग्रुप में शुक्रवार को संदेश प्रसारित कर शनिवार सुबह 11 बजे अटल उद्यान में ग्रीन डे मनाने के लिए सभी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं को पहुंचने के निर्देश दिए गए। संदेश में इसे अनिवार्य बताते हुए अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारी पर 500 रुपये जुर्माना लगाने की बात कही गई। साथ ही सभी को टिफिन लेकर आने के निर्देश दिए गए। आयोजन में ‘मिस ग्रीन क्वीन’ प्रतियोगिता के तहत प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान के लिए पुरस्कार की घोषणा भी की गई। व्हाट्सएप ग्रुप में बाद में भोजन की व्यवस्था के लिए बाहर से खाना मंगाने को लेकर भी चर्चा होने की जानकारी सामने आई है। इससे स्पष्ट होता है कि आयोजन अचानक नहीं बल्कि पहले से नियोजित था।
जिस समय केंद्र खुलना था, गार्डन में थे कर्मचारी
शासकीय व्यवस्था के अनुसार शनिवार को आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन सुबह 9.30 बजे से होना था। इसके बाद सुबह 10.30 बजे केंद्र पहुंचने वाले बच्चों को निर्धारित मीनू के अनुसार नाश्ता दिया जाना था। दोपहर 1.30 बजे बच्चों को गर्म भोजन उपलब्ध कराया जाना था जबकि केंद्र का संचालन दोपहर 3.30 बजे तक किया जाना निर्धारित है। आरोप है कि इन व्यवस्थाओं को दरकिनार कर अधिकांश कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं अटल उद्यान में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हो गई। ऐसे में उन केंद्रों में बच्चों को नाश्ता और गर्म भोजन उपलब्ध कराया गया या नहीं यह जांच का विषय बन गया है।
बिना अनुमति अवकाश पर भी उठे सवाल
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कार्यालय दिवस में आंगनबाड़ी केंद्र बंद रखकर कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं को इस प्रकार के निजी आयोजन में शामिल होने की अनुमति विभागीय स्तर से दी गई थी। यदि अनुमति नहीं थी तो कर्मचारियों को केंद्र छोड़कर कार्यक्रम में शामिल होने के निर्देश किस स्तर से दिए गए और अनुपस्थित रहने पर 500 रुपये जुर्माने का अधिकार किसके पास था इसकी भी जांच आवश्यक है।
सुपरवाइजर की भूमिका पर भी सवाल
बताया जा रहा है कि शहरी सेक्टर की सुपरवाइजर ममता खोब्रागढ़े को आयोजन की जानकारी थी। इसके बावजूद केंद्रों के संचालन को लेकर रोक-टोक या कार्रवाई नहीं किए जाने का आरोप है। हालांकि इस संबंध में संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आना बाकी है। करीब 27 आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन से जुड़े मामले को लेकर अब विभागीय जांच की मांग उठने लगी है।
परियोजना अधिकारी का मोबाइल बंद, जिला अधिकारी बोले- नहीं थी जानकारी
मामले में खैरागढ़ परियोजना अधिकारी श्रीमती रंजना श्रीवास्तव से दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन कार्यालयीन समय में उनका मोबाइल बंद मिला। इसके बाद मामले की जानकारी जिला परियोजना अधिकारी प्रीत राम खुटेल को दी गई।
जिला परियोजना अधिकारी ने आयोजन की जानकारी होने से इनकार करते हुए कहा कि उन्हें इस कार्यक्रम के संबंध में कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि मामले की जानकारी मिलने के बाद पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी तथा संबंधित आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और सुपरवाइजर को नोटिस जारी किया जाएगा।
अब जांच में खुलेगा केंद्र बंद रहने का सच
अटल उद्यान और महिला एवं बाल विकास विभाग के संबंधित जिला एवं ब्लॉक कार्यालय के बीच की दूरी अधिक नहीं है। ऐसे में कार्यालय दिवस में बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के एक साथ गार्डन में जुटने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगना भी सवालों के घेरे में है। हद यह भी है कि जिस अटल उद्यान में खुलेआम पूरा आयोजन किया गया वहां से कलेक्ट्रेट और कलेक्टर बंगले की दूरी भी महज 50 मीटर की दूरी पर है। यह दर्शाता है कि महिला एवं बाल विकास विभाग की कर्मचारियों को प्रशासनिक भय भी नहीं है वहीं आंगनबाड़ी केंद्र बंद रहने की स्थिति में बच्चों के लिए निर्धारित नाश्ता, गर्म भोजन तथा रेडी-टू-ईट खाद्य सामग्री की व्यवस्था का क्या हुआ इसकी जांच भी महत्वपूर्ण होगी। यदि केंद्र बंद थे तो उस दिन की खाद्य सामग्री और संबंधित मद में होने वाले व्यय का अभिलेख क्या दर्शाता है यह भी जांच का विषय है। फिलहाल जिला परियोजना अधिकारी द्वारा जांच और नोटिस की बात कहे जाने के बाद संबंधित कर्मचारियों पर कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है।