सिंघोरी के तालाब से बेखौफ मुरूम उत्खनन, जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। जिला मुख्यालय से लगे ग्राम पंचायत सिंघोरी में तालाब से कथित रूप से अवैध मुरूम उत्खनन का मामला सामने आया है। आरोप है कि व्यावसायिक एवं निर्माण कार्यों में उपयोग के लिए तालाब से लगातार मुरूम निकाली जा रही है। उत्खनन के चलते तालाब का स्वरूप प्रभावित होने के साथ यहां आने-जाने का रास्ता भी बाधित हो गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यदि संबंधित विभाग से वैध अनुमति नहीं ली गई है तो सार्वजनिक तालाब से इस तरह मुरूम निकालना गंभीर मामला है। सवाल यह है कि जिला मुख्यालय से महज कुछ दूरी पर कथित रूप से चल रही इस गतिविधि की जानकारी जिम्मेदार अधिकारियों को नहीं है या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है? भूमाफियाओं के हौसले बुलंद, प्रशासन मौन ग्रामीणों के बीच यह भी चर्चा है कि कथित उत्खननकर्ताओं को स्थानीय स्तर पर संरक्षण प्राप्त है। भूमाफियाओं और जिम्मेदार लोगों के बीच कथित आपसी सहमति अथवा ‘सेटलमेंट’ की चर्चाओं ने मामले को और गंभीर बना दिया है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है, लेकिन जनहित में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। तालाब जैसे सार्वजनिक जलस्रोत से मुरूम उत्खनन केवल खनिज नियमों का विषय नहीं बल्कि ग्रामीणों के सार्वजनिक संसाधन और पर्यावरण से भी जुड़ा मामला है। यदि उत्खनन अवैध पाया जाता है तो प्रशासन को संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई के साथ तालाब और प्रभावित रास्ते को पूर्व स्थिति में लाने की दिशा में भी कदम उठाना चाहिए। जांच से सामने आ सकती है पूरी सच्चाई प्रशासन द्वारा मौके का निरीक्षण, भूमि एवं उत्खनन की अनुमति की जांच तथा निकाली गई मुरूम के परिवहन की पड़ताल की जाए तो पूरे मामले की वास्तविकता सामने आ सकती है। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि कथित उत्खनन इतने समय से कैसे चलता रहा और जिम्मेदार विभागों ने क्या कार्रवाई की। जनहित का सवाल यही है कि सार्वजनिक तालाब और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? अब ग्रामीणों को जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की उम्मीद है।

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