शरद पूर्णिमा पर प्रगतिशील लेखक संघ ने किया रचनापाठ, डॉ. जीवन यदु की कविता रही खास आकर्षण

खैरागढ़। प्रगतिशील लेखक संघ खैरागढ़ और पाठक मंच खैरागढ़ के संयुक्त तत्वावधान में शरद पूर्णिमा के अवसर पर साहित्यिक चर्चा एवं रचनापाठ का आयोजन प्रतिष्ठित साहित्यकार डॉ. जीवन यदु के निवास पर किया गया। कार्यक्रम में साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया तथा आगामी साहित्यिक गतिविधियों और योजनाओं पर विचार-विमर्श किया। लंबे अंतराल के बाद डॉ. जीवन यदु का कविता पाठ इस आयोजन का विशेष आकर्षण रहा। कार्यक्रम की शुरुआत गिरधर राजपूत ने अंबिकापुर में आयोजित प्रगतिशील लेखक संघ की राज्यस्तरीय बैठक का प्रतिवेदन प्रस्तुत कर की। उन्होंने बैठक में हुई चर्चाओं और साहित्यिक गतिविधियों की जानकारी दी। इसके बाद प्रगतिशील लेखक संघ खैरागढ़ के अध्यक्ष संकल्प पहटिया ने सूत्र पत्रिका के संपादक विजय सिंह के उस प्रस्ताव की जानकारी दी जिसमें राष्ट्रीय स्तर के सूत्र सम्मान का आयोजन खैरागढ़ में कराने का सुझाव दिया गया है।

रचनापाठ की शुरुआत अशोक जंघेल ने झूल भैया झूल, कदम के फूल संस्मरण के भावपूर्ण पाठ से की। इसके बाद गिरधर सिंह राजपूत ने व्यंग्य गीत बड़ा घालमेल हे जी, अधिकल्प यदु ने मेरा घर, मेरा पृथ्वी और मेरा आकाश, रवि झोका ने सोने के प्रति, यशपाल जंघेल ने तेजपत्ती और संकल्प पहटिया ने सिवाय गोली मारने के कोई चारा नहीं शीर्षक से अपनी कविताएं प्रस्तुत की वहीं विनयशरण सिंह ने गद्य व्यंग्य जेब का पाठ किया। कार्यक्रम को विशेष ऊंचाई देते हुए डॉ. जीवन यदु ने लंबे अंतराल के बाद अपनी रचना बादर करे साहूकारी का पाठ किया। यह रचना हेमचंद यादव विश्वविद्यालय में संग्रहित है। उनकी प्रस्तुति ने उपस्थित साहित्यकारों और श्रोताओं को भावुक करने के साथ नई ऊर्जा भी दी। समापन अवसर पर संकल्प पहटिया ने कहा कि एक वर्ष पहले इसी दिन डॉ. जीवन यदु ब्रेन हेमरेज के कारण अस्पताल में भर्ती हुए थे। ऐसे में एक वर्ष बाद उसी तारीख को उनके बीच उपस्थित होकर कविता पाठ करना सभी के लिए सौभाग्य और शरद पूर्णिमा के आयोजन की सार्थकता का प्रतीक है। विनयशरण सिंह ने कहा कि जीवन भैया से मिलना और उनकी कविताएं सुनना इस आयोजन की बड़ी उपलब्धि रही। पाठक मंच खैरागढ़ के संयोजक डॉ. प्रशांत झा ने कहा कि रचनापाठ हमेशा से सुखद अनुभव रहा है। इस बार शरद पूर्णिमा पर डॉ. जीवन यदु का कविता पाठ सभी को नई ऊर्जा से भरने वाला रहा।कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन सहायक प्राध्यापक यशपाल जंघेल ने किया। उन्होंने कहा कि रचनापाठ में प्रस्तुत रचनाओं के तेवर और भाव अलग-अलग रहे जिसने आयोजन को विविधता और संपूर्णता प्रदान की।

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