राजस्व काम छोड़ गैर-राजस्व कार्य कराने से भड़के कोटवार, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। गांवों की राजस्व एवं प्रशासनिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी माने जाने वाले कोटवारों का असंतोष अब जिला मुख्यालय तक पहुंच गया है। विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर रहे कोटवारों ने आंदोलन समाप्त करने के बाद कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। उन्होंने पद की मूल जिम्मेदारियों से इतर गैर-राजस्व कार्य कराए जाने और नियुक्ति संबंधी मामलों के निराकरण में देरी को लेकर प्रशासन के प्रति नाराजगी जताई। कोटवार एसोसिएशन ऑफ छत्तीसगढ़ की जिला इकाई के पदाधिकारियों और सदस्यों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर अपनी समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं। संघ के अनुसार गांवों में राजस्व और प्रशासनिक सूचनाओं के संप्रेषण से लेकर विभिन्न राजस्व संबंधी दायित्वों के निर्वहन तक कोटवार महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद कई स्थानों पर उनसे उनकी नियुक्ति के उद्देश्य से अलग कार्य कराए जा रहे हैं।

कोटवारों ने खैरागढ़ तहसीलदार कार्यालय और एसडीएम कार्यालय से जुड़े अधिकारियों पर झाड़ू-पोछा कराने चाय-पानी सहित अन्य गैर-राजस्व कार्य करवाने का आरोप लगाया। संघ का कहना है कि जब कोटवारों की नियुक्ति राजस्व एवं प्रशासनिक कार्यों के लिए की गई है तो उनसे दूसरे कार्य क्यों कराए जा रहे हैं। उन्होंने ऐसे कार्यों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। ज्ञापन में ग्राम सलोनी और दल्लीखोल में कोटवार परिवारों के स्थान पर गैर-कोटवार परिवार से नियुक्ति किए जाने का आरोप लगाया गया है। संघ ने संबंधित प्रकरणों के लंबे समय से लंबित रहने पर भी सवाल उठाए। कोटवारों ने इन मामलों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने तथा उनकी अन्य लंबित मांगों का शीघ्र निराकरण करने की मांग प्रशासन से की है।

कोटवार संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का समयबद्ध तरीके से निराकरण नहीं किया गया तो प्रदेश स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। फिलहाल हड़ताल समाप्त हो गई है लेकिन कोटवारों की नजर अब प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी है। गांवों की राजस्व व्यवस्था में अहम भूमिका निभाने वाले कोटवारों को गैर-राजस्व कार्यों से मुक्त रखने और लंबित नियुक्ति व अन्य मांगों के समाधान के लिए प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं यह देखने वाली बात होगी।

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