बैताल रानी घाटी में तेंदुओं की आहट से दहशत, पर्यटकों ने एक साथ तीन देखे; वन विभाग ने दो तेन्दुओं की पुष्टि की

खैरागढ़। छुईखदान क्षेत्र की प्रसिद्ध बैताल रानी घाटी में छिंदारी रिसोर्ट के पास एक साथ तीन तेंदुए दिखाई देने की खबर से क्षेत्र में दहशत का माहौल है। पर्यटकों द्वारा तेंदुओं को एक साथ देखे जाने की जानकारी सामने आने के बाद घाटी मार्ग से गुजरने वाले राहगीरों, आसपास के ग्रामीणों और रिसोर्ट पहुंचने वाले पर्यटकों की चिंता बढ़ गई है। हालांकि वन विभाग ने क्षेत्र में दो तेंदुओं की सक्रियता की जानकारी देते हुए कहा है कि जंगल से घिरे इस इलाके में वन्यजीवों की आवाजाही सामान्य है और विभागीय अमला लगातार गश्त कर रहा है।

प्राकृतिक सौंदर्य, घने जंगलों और आकर्षक पहाड़ियों के लिए प्रसिद्ध बैताल रानी घाटी जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है। यहां छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों से भी पर्यटक पहुंचते हैं। इसके अलावा आसपास के ग्रामीणों और राहगीरों की नियमित आवाजाही बनी रहती है। ऐसे में छिंदारी रिसोर्ट के पास एक साथ तीन तेंदुए दिखाई देने की खबर ने लोगों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले भी इसी क्षेत्र में वनभैंसा दिखाई देने की खबर सामने आई थी। लगातार वन्यजीवों की मौजूदगी की सूचनाओं के बीच लोगों का कहना है कि पर्यटन स्थल और आवागमन वाले मार्गों पर सुरक्षा संबंधी सतर्कता बढ़ाई जानी चाहिए ताकि किसी अप्रिय घटना की आशंका को कम किया जा सके।

वन मंडल अधिकारी संजय यादव ने बताया कि बैताल रानी घाटी और छिंदारी का पूरा क्षेत्र वनाच्छादित है। यहां तेंदुओं सहित अन्य वन्यप्राणियों की आवाजाही बनी रहती है। विभागीय अमला क्षेत्र में लगातार निगरानी और गश्त कर रहा है। उन्होंने बताया कि फिलहाल इस इलाके में दो तेंदुओं की हलचल की जानकारी है। बहरहाल वन विभाग की ओर से राहगीरों और पर्यटकों को वन क्षेत्र के भीतर प्रवेश नहीं करने तथा आवागमन के दौरान सतर्कता बरतने की हिदायत दी जा रही है। वन्यजीवों की मौजूदगी वाले क्षेत्र में सावधानी बरतना जरूरी है। लोगों को किसी भी वन्यप्राणी के करीब जाने या उसे परेशान करने से बचना चाहिए।

तेंदुओं की मौजूदगी की खबर के बाद स्थानीय स्तर पर वन विभाग से क्षेत्र की स्थिति की गंभीरता से जांच करने और वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखने की मांग की जा रही है। लोगों का कहना है कि घाटी मार्ग और रिसोर्ट के आसपास संवेदनशील स्थानों पर चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं, ताकि पर्यटकों और राहगीरों को पहले से सतर्क किया जा सके। इसके साथ ही नियमित गश्त को प्रभावी बनाने, वन्यजीवों की आवाजाही वाले स्थानों पर कैमरा ट्रैप लगाने और आवश्यकतानुसार अन्य निगरानी उपाय अपनाने की जरूरत भी जताई जा रही है। इससे वन्यजीवों की गतिविधियों की जानकारी जुटाने और लोगों की सुरक्षा के लिए समय रहते जरूरी कदम उठाने में मदद मिल सकती है। गौरतलब है कि बैताल रानी घाटी और छिंदारी का वन क्षेत्र जैव विविधता से समृद्ध है। ऐसे क्षेत्रों में वन्यजीवों की मौजूदगी स्वाभाविक है लेकिन पर्यटन और आवागमन वाले स्थानों के आसपास उनकी सक्रियता की सूचना मिलने पर अतिरिक्त सावधानी जरूरी हो जाती है। पर्यटकों और ग्रामीणों को जंगल के भीतर जाने, तेंदुओं के करीब पहुंचने, उनका पीछा करने या उन्हें उकसाने से बचना चाहिए। तेंदुआ दिखाई देने पर सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए तत्काल वन विभाग को सूचना देना चाहिए। अब लोगों की अपेक्षा है कि वन विभाग वन्यजीवों की गतिविधियों पर सतत नजर रखने के साथ सुरक्षा संबंधी जानकारी सार्वजनिक करे ताकि पर्यटन गतिविधियां भी सुरक्षित रहें और वन्यजीवों को भी अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

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