
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। ग्राम देवरी निवासी जनकलाल कोठले ने अपने दिवंगत पिता स्वर्गीय गणेश राम कोठले के नाम दर्ज पैतृक कृषि भूमि का कथित रूप से फर्जी एवं कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर अवैध नामांतरण किए जाने का आरोप लगाते हुए कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक तथा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) खैरागढ़ को शिकायत सौंपकर मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। शिकायत में जनकलाल कोठले ने आरोप लगाया है कि होरीलाल वर्मा ने कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार कर राजस्व विभाग को गुमराह किया और विधि सम्मत प्रक्रिया का पालन किए बिना पैतृक कृषि भूमि का नामांतरण अपने नाम करा लिया।शिकायतकर्ता के अनुसार वर्ष 1992 से 2014-15 तक के बी-1, खसरा एवं अन्य राजस्व अभिलेखों में स्वर्गीय गणेश राम कोठले के नाम कुल आठ खसरों की कृषि भूमि दर्ज थी। वर्ष 2019 में उनके निधन के बाद उत्तराधिकार की प्रक्रिया के दौरान कुछ खसरों का नामांतरण वारिसों के नाम किया गया, लेकिन दूसरी ऋण पुस्तिका उपलब्ध नहीं होने के कारण खसरा क्रमांक 597/2, 649/2 एवं 658 का नामांतरण नहीं हो सका।शिकायत में बताया गया है कि बाद में पुराने राजस्व अभिलेख मिलने पर उक्त खसरों पर भी स्वर्गीय गणेश राम कोठले का स्वामित्व प्रमाणित हुआ। हालांकि वर्तमान ऑनलाइन राजस्व रिकॉर्ड में नामांतरण प्रकरण क्रमांक 202506290700046 (पंजीयन दिनांक 19 जून 2025) के माध्यम से संबंधित भूमि होरीलाल वर्मा के नाम दर्ज होना सामने आया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में परिवार के किसी भी सदस्य को न तो नोटिस जारी किया गया और न ही अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। जनकलाल कोठले ने शिकायत में यह भी उल्लेख किया है कि उनके परिवार ने कभी भी उक्त भूमि का विक्रय, दान, बंटवारा अथवा किसी अन्य माध्यम से स्वामित्व हस्तांतरित नहीं किया। वर्तमान में भी विवादित भूमि, उस पर स्थित धनकुट्टी मशीन एवं भवन पर परिवार का कब्जा बना हुआ है। शिकायतकर्ता ने पूरे नामांतरण प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने, आवेदन, आदेश, नोटिस, तामील रिपोर्ट सहित सभी मूल अभिलेख सुरक्षित रखने तथा आवश्यकता पड़ने पर दस्तावेजों एवं हस्ताक्षरों की फोरेंसिक जांच कराने की मांग की है। साथ ही जांच में आरोप सही पाए जाने पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की प्रासंगिक धाराओं के तहत होरीलाल वर्मा सहित अन्य संबंधित व्यक्तियों एवं दोषी अधिकारियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग भी की गई है। इसके अतिरिक्त शिकायतकर्ता ने जांच पूरी होने तक विवादित भूमि के नामांतरण, विक्रय, बंधक, पट्टा अथवा किसी भी प्रकार के राजस्व परिवर्तन पर रोक लगाने के साथ ही भूमि से उत्पादित धान एवं अन्य कृषि उपज के समर्थन मूल्य पर विक्रय, ई-उपार्जन पंजीयन तथा शासकीय योजनाओं के लाभ पर भी अस्थायी रोक लगाने की मांग की है।शिकायत के साथ मृत्यु प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, पुराने बी-1, खसरा, वर्ष 1992 से 2014-15 तक के राजस्व अभिलेख, वर्ष 2019 के उत्तराधिकार संबंधी दस्तावेज, वर्तमान ऑनलाइन रिकॉर्ड तथा नामांतरण प्रकरण से संबंधित उपलब्ध दस्तावेज भी संलग्न किए गए हैं। मामले को लेकर अब प्रशासन की जांच और आगे की कार्रवाई पर क्षेत्रवासियों की नजरें टिकी हुई हैं।