नगर पालिका खैरागढ़ में 1.31 करोड़ की खरीदी पर घमासान: दो महीने में जवाब दे गए ई-रिक्शा

सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। नगर पालिका खैरागढ़ में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन योजना के तहत लगभग 1 करोड़ 31 लाख रुपये की गई खरीदी को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस नेताओं ने खरीदी प्रक्रिया में कथित अनियमितता, घटिया गुणवत्ता और तकनीकी मानकों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है साथ ही जांच पूरी होने तक संबंधित भुगतान पर रोक लगाने की भी मांग की गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं विधायक प्रतिनिधि मनराखन देवांगन, नेता प्रतिपक्ष दीपक देवांगन, वरिष्ठ कांग्रेस नेता सूर्यकांत यादव, युवा नेता शेखर दास सानू सहित अन्य नेताओं ने सौंपे गए आवेदन में आरोप लगाया है कि केंद्र प्रवर्तित योजना के अंतर्गत 15वें वित्त आयोग की राशि से जेम (GeM) पोर्टल के माध्यम से हाथ रिक्शा, ई-रिक्शा, डस्टबिन, मिनी टिप्पर तथा हाइड्रोलिक ट्रॉली स्काई लिफ्ट मशीन सहित अन्य सामग्री खरीदी गई लेकिन खरीदी में गुणवत्ता और तकनीकी मानकों का समुचित पालन नहीं किया गया। कांग्रेस नेताओं के आरोप के अनुसार खरीदे गए हाथ रिक्शा और ई-रिक्शा महज दो महीने के भीतर ही खराब होने लगे जिससे नगर पालिका के स्वच्छता कर्मचारियों को रोजमर्रा के कार्य में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है वहीं ज्ञापन सौंपने वाले नेताओं का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद उपकरणों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं और इसका सीधा असर शहर की सफाई व्यवस्था पर पड़ रहा है। ज्ञापन में हाइड्रोलिक ट्रॉली स्काई लिफ्ट मशीन की खरीदी को भी संदेह के घेरे में बताया गया है। आरोप लगाया गया है कि मशीन का निर्धारित गुणवत्ता एवं तकनीकी मानकों के अनुरूप सत्यापन किए बिना ही आपूर्ति स्वीकार कर ली गई और उसके स्पेसिफिकेशन की विधिवत तकनीकी जांच किए बिना भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। कांग्रेस नेताओं ने मामले में भुगतान से पूर्व आवश्यक परीक्षण और अनुमोदन प्रक्रिया के पालन पर भी सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि सार्वजनिक धन से की गई करोड़ों रुपये की खरीदी में गुणवत्ता से समझौता किया गया है तो इससे ठोस अपशिष्ट प्रबंधन योजना का उद्देश्य प्रभावित होगा और शहर को अपेक्षित लाभ नहीं मिल सकेगा। इसी आधार पर कलेक्टर से संपूर्ण खरीदी की स्वतंत्र एवं तकनीकी जांच कराने, स्काई लिफ्ट मशीन के स्पेसिफिकेशन का विशेषज्ञों से परीक्षण कराने तथा जांच पूरी होने तक संबंधित भुगतान प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की गई है। अब इस मामले में जिला प्रशासन के रुख पर सभी की निगाहें टिकी हैं। यदि जांच के आदेश जारी होते हैं तो नगर पालिका की करोड़ों रुपये की खरीदी की परतें खुल सकती हैं।

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