दहेज मुक्त सामूहिक विवाह से समाज में बदलाव की बह रही नई बयार

खैरागढ़। जिले के ग्राम मड़ौदा स्थित बाजार चौक में दहेज प्रथा के विरुद्ध एक प्रेरणादायक पहल देखने को मिली जहां देश के प्रसिद्ध एवं प्रभावी संत रामपाल महाराज के सान्निध्य में दहेज रहित सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में दो जोड़ों का विवाह महज 17 मिनट में सादगीपूर्ण एवं आध्यात्मिक विधि-विधान के साथ संपन्न कराया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ सत्संग के साथ हुआ जिसमें आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया सत्संग के पश्चात पारंपरिक रीति-रिवाजों एवं देवी-देवताओं के आवाहन के साथ विवाह संस्कार पूर्ण किए गए जो सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक मूल्यों का प्रतीक बनेइस अवसर पर काजल दासी (ग्राम मड़ौदा) एवं योगेन्द्र दास (ग्राम मढ़ईपुर, खरोरा) तथा हेमलता दासी (ग्राम बघमर्रा, जालबांधा) एवं दुर्गेश दास (ग्राम चांदों, डोंगरगांव) परिणय सूत्र में बंधे। समारोह में उपस्थित ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने इस सरल एवं अनुकरणीय परंपरा का स्वागत कियाआयोजन स्थल पर आगंतुकों के लिए चाय-बिस्कुट की व्यवस्था की गई जबकि बाहर से आए श्रद्धालुओं के लिये भंडारे का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम में न केवल सामाजिक सहभागिता को सुदृढ़ किया बल्कि दहेज जैसी कुप्रथा के विरुद्ध जागरूकता का संदेश भी प्रसारित किया। उल्लेखनीय है कि संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन में दहेज मुक्त विवाह, रक्तदान शिविर, निःशुल्क चिकित्सा सेवाएं, स्वच्छता अभियान, गौ-रक्षा, जल सेवा एवं वृक्षारोपण जैसे अनेक जनकल्याणकारी कार्य संचालित किए जा रहे हैं इन्हीं प्रयासों के परिणामस्वरूप दहेज प्रथा के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान को व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है। ज्ञात हो कि केवल के.सी.जी. जिले में ही अब तक 175 से अधिक जोड़ों का विवाह इस पद्धति से संपन्न हो चुका है जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है। इस मानवीय आयोजन ने सादगीपूर्ण व कम खर्च विवाह की परंपरा को प्रोत्साहित किया है और सामाजिक सहयोग, समानता और नैतिक मूल्यों की स्थापना की दिशा में एक क्रांतिकारी प्रयास साबित हो रहा है।

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