
वन मंडल खैरागढ़ के संयोजन में हुआ विशिष्ट आयोजन
बड़ी संख्या में जुटे पर्यावरण एवं पक्षी प्रेमी
पर्यावरण संतुलन और संरक्षण का दिया गया सशक्त संदेश
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। प्रकृति, परंपरा और संरक्षण के त्रिवेणी संगम का सजीव उदाहरण सोमवार को छिंदारी बांध क्षेत्र में देखने को मिला जब विश्व आर्द्रभूमि दिवस के अवसर पर ईको टूरिज्म सेंटर में विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। खैरागढ़ वनमंडल के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम ने विद्यार्थियों से लेकर आमजन तक को आर्द्रभूमि के महत्व से प्रत्यक्ष रूप से जोड़ते हुए पर्यावरण संतुलन की आवश्यकता को रेखांकित किया। कार्यक्रम में नवीन शासकीय कन्या महाविद्यालय खैरागढ़ की छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई।
विविध पक्षियों के दर्शन से गदगद हुए विद्यार्थी
प्रातःकालीन जब पक्षी अपने प्राकृतिक परिवेश में सर्वाधिक सक्रिय रहते हैं छात्राओं को नौका विहार के माध्यम से छिंदारी बांध की आर्द्रभूमि का भ्रमण कराया गया। इस दौरान उन्होंने कॉमन पोचार्ड, ग्रीन बी-ईटर, जंगल बेबलर, इंडियन रॉबिन, सरपेंट हेडेड ईगल तथा इंडियन रोलर जैसे दुर्लभ और आकर्षक पक्षियों को निकट से देखा। इस अनुभव ने विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति जिज्ञासा, संवेदनशीलता और संरक्षण की भावना को और प्रबल किया। भ्रमण उपरांत आयोजित संगोष्ठी में वनमंडल अधिकारी पंकज राजपूत एवं पक्षी विशेषज्ञों ने आर्द्रभूमियों को जीवनदायिनी पारिस्थितिकी प्रणाली बताते हुए इनके संरक्षण की अनिवार्यता पर प्रकाश डाला।
डीएफओ पंकज राजपूत ने कहा कि वेटलैंड्स न केवल जैव विविधता का आधार हैं बल्कि जल शुद्धिकरण, बाढ़ नियंत्रण, जलवायु संतुलन और सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाती हैं। इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों, पंचायत पदाधिकारियों, स्थानीय नागरिकों, विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों तथा वन विभाग के अधिकारियों की सक्रिय सहभागिता रही। कार्यक्रम में इस वर्ष की थीम “वेटलैंड्स और पारंपरिक ज्ञान” पर विशेष चर्चा हुई जिसमें वक्ताओं ने स्थानीय एवं पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक संरक्षण प्रयासों से जोड़ने पर बल दिया। कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी लोगों ने आर्द्रभूमि संरक्षण की शपथ लेते हुए स्वयं को “वेटलैंड मित्र” घोषित किया। साथ ही स्वच्छता अभियान चलाकर प्लास्टिक मुक्त छिंदारी का संदेश दिया गया। नवीन शासकीय कन्या महाविद्यालय की छात्राओं ने वेटलैंड बर्ड वॉचिंग और ईको कैंप के अनुभव साझा किए जिससे यह आयोजन एक प्रेरणादायी और अनुकरणीय पर्यावरणीय पहल के रूप में उभरकर सामने आया। इस दौरान वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।